✍️गिरधर पाराशर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद भीलवाड़ा जिले के मांडलगढ़ भाग का भाग अभ्यास वर्ग मांडलगढ़ में संपन्न हुआ। इस भाग अभ्यास वर्ग में संगठनात्मक, छात्रहित और आगामी कार्यक्रमों पर विस्तार से चर्चा की गई जिसमें विभाग संयोजक कुनाल सिंह राणावत जिला विस्तारक अनिल सुथार उपस्थित रहे। वर्ग के समापन सत्र में जिला संयोजक भावेश छिपा ने मांडलगढ़, बिजौलिया एवं कोटड़ी नगर की नवीन कार्यकारिणी की घोषणा की, जिसमें मांडलगढ़ नगर मंत्री अर्जुन साहू, बिजौलिया नगर मंत्री दीपक धाकड़,कोटड़ी नगर मंत्री राहुल आचार्य को नियुक्त किया। अभ्यास वर्ग में नगरों की कार्यकारिणी की घोषणा की जिसमें मांडलगढ़ नगर सह मंत्री कविता वैष्णव, संजू गुर्जर,नरेश शर्मा, अर्जुन साहू, कार्यालय मंत्री अर्क वैष्णव, एसएफडी संयोजक मनीष यादव,सह संयोजक लोकेश सैनी,कानाराम मीणा, एसएफएस संयोजक राहुल बैरवा, सह संयोजक संग्राम सिंह,मूलचंद मीणा, रवि सालवी, राष्ट्रीय कलमंच संयोजक चंचल धाकड़, सह संयोजक नेहा सेन, खेलो भारत संयोजक सुजल मीणा, सह संयोजक प्रीतम सेन,रविन्द्र सेन, मीडिया संयोजक अंकित आचार्य, सोशल मीडिया संयोजक जगदी...
जल ही जीवन फिर भी तीन साल बाद भी रेसुंदा-कालीघाटी में नल कनेक्शन के बावजूद पानी की किल्लत, राम भरोसे
रेसुंदा-कालीघाटी में नल कनेक्शन के बावजूद पानी की किल्लतः 2 हजार जमा कराने के बाद भी नहीं मिल रहा पानी, ग्रामीण परेशान
✍️गिरधर पाराशर
जल जीवन मिशन के तहत घर-घर नल कनेक्शन दिए जाने के बावजूद बिजौलिया क्षेत्र के रेसुंदा और काली घाटी गांवों में पानी की भारी किल्लत बनी हुई है। तीन साल पहले ग्रामीणों से नल कनेक्शन दिलाने के नाम पर हर परिवार से 2 हजार रुपए की राशि इकठ्ठी की गई थी। सैकड़ों परिवारों ने इस उम्मीद में पैसे जमा करा दिए कि अब उन्हें घर बैठे पानी की सुविधा मिलेगी, लेकिन आज भी हालात जस के तस हैं।
महिलाएं टंकियों पर निर्भर
रेसुंदा की महिलाओं ने बताया- नलों में पानी सप्लाई नहीं होने से वो अब भी गांव में लगी सार्वजनिक पानी की टंकियों पर निर्भर हैं। चार-चार दिन के अंतराल में एक बार पानी आता है, वो भी महज 15 से 20 मिनट के लिए। ऐसे में परिवार की जरूरत पूरी करना मुश्किल हो जाता है।
सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप
गांव के दीपक शर्मा ने बताया कि सरकार ने करोड़ों रुपए खर्च कर चंबल परियोजना और जल जीवन मिशन के जरिए हर घर नल से जल सप्लाई का वादा किया था, लेकिन धरातल पर हकीकत अलग है। नलों में पानी नहीं आने से ग्रामीण खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि काली घाटी गांव का हाल भी ऐसा ही है। वहां भी लोगों से पैसे जमा कराए गए और कनेक्शन दिए गए, मगर नलों में आज तक पानी नहीं आया। ग्रामीणों ने कई बार विभागीय अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन समस्या का कोई स्थायी समाधान अब तक नहीं निकला है।
विभाग की सफाई
चंबल परियोजना के एईएन अशोक सोनी ने बताया- रेसुंदा गांव में जल सप्लाई होती है, लेकिन पानी का प्रेशर कम होनेहैं। चार-चार दिन के अंतराल में एक बार पानी आता है, वो भी महज 15 से 20 मिनट के लिए। ऐसे में परिवार की जरूरत पूरी करना मुश्किल हो जाता है।